जाने तुरतुरिया धाम के बारे में रोचक बातें

क्या आप तुरतुरिया धाम बलोदा बाज़ार के बारे में जानते है यदि नही तो हमने आपको इस पोस्ट में तुरतुरिया धाम के बारे में पूरी जानकारी दी है जिसे आप पढ़ सकते है। इसमें हमने तुरतुरिया धाम के इतिहास तथा वह क्यों प्रसिद्ध है बताया है जिसे आप देख सकते है। 

यदि आप बलोदा बाज़ार में स्थित इस अद्वितीय स्थल की सैर के लिए जाना चाहते है तो आप सही जगह पर आये है हम आपको इस पोस्ट में turtutiya dham के बारे में पूरी जानकारी देंगे जिससे की आप इस स्थल के बारे में अच्छी तरह से जान सके और यहाँ अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ घूमने के लिए आ सके।

तो चलिए बिना देरी किये जानते है इस अद्वितीय स्थल के बारे में जिसका नाम है तुरतुरिया धाम जो छत्तीसगढ़ के बलोदा बाज़ार जिले में स्थित है।

Turtutiya Dham | तुरतुरिया धाम बलोदा बाज़ार

तुरतुरिया, छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में स्थित है और यहां का महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल माना जाता है। इस स्थल को रायपुर से 84 किलोमीटर और बलौदाबाजार से 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के कारण ‘तुरतुरिया’ के नाम से प्रसिद्ध है।

तुरतुरिया में बहुत सुंदर पहाड़ों और प्राकृतिक दृश्यों से घिरा एक जलकुंड स्थित है, जिसे बहुत पुरानी ईंटों से बनाया गया है। यहां पर गोमुख से निकलने वाला जल प्रस्तर महत्वपूर्ण है और इसके आसपास विष्णु जी की प्राचीन प्रतिमाएं भी हैं।

तुरतुरिया में हर साल रामनवमी और वाल्मीकि जयंती पर विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होता है, जिसमें लोग दूर-दूर से आते हैं। यहां का वातावरण शांति और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, जो यात्रियों को आकर्षित करता है।

तुरतुरिया में बौद्ध, वैष्णव और शैव धर्म से संबंधित मूर्तियां और प्राचीन पाषाण स्तंभ भी पाए जाते हैं, जो इस स्थल की मिलीजुली संस्कृति को दर्शाते हैं। इसके अलावा, यहां पर शिलालेख और प्राचीन बुद्ध की प्रतिमाएं भी हैं, जो इस स्थल का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ाती हैं।

History of Turtutiya Dham | तुरतुरिया का इतिहास

तुरतुरिया एक खास स्थल है जो रायपुर से 84 किलोमीटर दूर है। यहां पर पहाड़ों की सुंदरता और प्राकृतिक वातावरण है। इस स्थल का नाम तुरतुरिया पड़ने का कारण यह है कि इसासे निकलने वाले बुलबुलों के कारण तुरतुर की ध्वनि सुनाई देती है।

तुरतुरिया का ऐतिहासिक महत्व भी है। यहां कहा जाता है कि त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम था और लव-कुश का जन्म यहीं हुआ था। इस स्थल पर विष्णु जी की 8वीं-9वीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमाएं हैं जो इस स्थल की महत्वपूर्णता को और भी बढ़ाती हैं।

तुरतुरिया में एक बहुत पुरानी सुंदर गाय का मोख भी है जिसमें पानी गिरता है और उसी से गोमुख नामक तालाब बनता है। यहां पर अनेक प्राचीन मंदिर और शिलालेख भी हैं जो इस स्थल की ऐतिहासिक महत्वपूर्णता को दर्शाते हैं।

तुरतुरिया में हर साल दिसंबर-जनवरी में एक मेला भी लगता है जिसमें बहुत सारे लोग आते हैं। इस स्थल की ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है।

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How to reach Turturiya Dham | तुरतुरिया कैसे पहुचे ?

तुरतुरिया धाम छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में स्थित है, और यहाँ पहुँचना बहुत ही आसान है। यहाँ तक पहुँचने के लिए आप निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

वाहन से:

तुरतुरिया धाम तक पहुँचने के लिए सबसे अच्छा तरीका आपका वाहन है। आप रोड रूट का इस्तेमाल करके यहाँ पहुँच सकते हैं। रायपुर से तुरतुरिया धाम की दूरी लगभग 84 किलोमीटर है और बलौदा बाजार से लगभग 29 किलोमीटर है। जिससे की आप यहाँ अपने बाइक से भी पहुच सकते है।

बस से:

अगर आपके पास वाहन नहीं है, तो रायपुर या बलौदा बाजार से टैक्सी या बस का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बसें नियमित अंतराल पर चलती हैं और आपको तुरतुरिया धाम तक पहुँचा सकती हैं।

ट्रेन से:

रायपुर रेलवे स्टेशन से भी तुरतुरिया धाम तक पहुँचा जा सकता है। रायपुर से ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं जो आपको समय-समय पर यहाँ तक पहुँचा सकती हैं।

तुरतुरिया धाम एक प्राकृतिक और धार्मिक स्थल है, जिसे देखने के लिए बहुत से लोग यहाँ यात्रा करते हैं। इस स्थल की सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।

तुरतुरिया धाम: कुछ प्रश्न और उनके उत्तर

1. तुरतुरिया धाम कहाँ स्थित है?

तुरतुरिया धाम, छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में स्थित है। यह रायपुर से 84 किलोमीटर और बलौदा बाजार से 29 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

2. तुरतुरिया धाम का नाम कैसे पड़ा?

इसका नाम बलभद्री नाले के जलप्रवाह से ‘तुतुर’ ध्वनि के कारण पड़ा है।

3. तुरतुरिया धाम का धार्मिक महत्व क्या है?

यह स्थान लव-कुश के जन्मस्थान और महर्षि वाल्मीकि का आश्रम माना जाता है। हर साल राम नवमी और वाल्मीकि जयंती पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेला आयोजित होता है।

4. तुरतुरिया धाम का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

यहां बौद्ध, वैष्णव और शैव धर्म से संबंधित मूर्तियां और प्राचीन पाषाण स्तंभ पाए जाते हैं। विष्णु जी की 8वीं-9वीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमाएं भी यहां मौजूद हैं।

5. तुरतुरिया धाम में क्या देखने लायक है?

महर्षि वाल्मीकि आश्रम, लव-कुश जन्मस्थान, गोमुख, विष्णु जी की मूर्तियाँ, बलभद्री नाला, प्राचीन मंदिर, बौद्ध, वैष्णव और शैव धर्म से संबंधित मूर्तियां और भी बहुत कुछ।

निष्कर्ष

तुरतुरिया धाम एक ऐसा स्थान है जो प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व से युक्त है। यहाँ पर्यटकों को पहाड़ों की गोद में बसे हुए एक शांत और प्राकृतिक वातावरण मिलता है, जो स्थानीय और बाहरी दोनों पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहाँ के विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों ने इसे एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण स्थान बना दिया है।

तुरतुरिया धाम का वातावरण इसे विशेष बनाता है। यहाँ के प्राचीन विरासत और धार्मिक महत्व वाले स्थल जैसे कि विष्णु जी के प्रस्तर, वीर प्रतिमाएं, और प्राचीन पाषाण स्तम्भ, इसे एक अद्वितीय स्थान बनाते हैं। यहाँ का गोमुख से निकलने वाला जल एक प्राचीन ईंटों से निर्मित जलकुंड में गिरता है, जिसे देखकर लोग धार्मिक आदर से भर जाते हैं।

इस प्रकार, turtutiya dham एक ऐसा स्थान है जो प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिकता का अनुभव कराता है और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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