भोरमदेव मंदिर जाने (इतिहास, महत्व और विशेषता) पूर्ण जानकारी

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको छत्तीसगढ़ के एक प्राचीन और ऐतेहासिक मंदिर, भोरमदेव मंदिर के बारे में बताने वालें है, जो जिला कबीरधाम में स्थित, कवर्धा से महज 18 किलोमीटर दूर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है व अपनी शिल्प कला और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इस आर्टिकल में हम मंदिर के इतिहास, विशेषताओं और महत्त्वो के अलावा मंदिर के पास स्थित, अन्य पर्यटन स्थल के बारे में भी जानेंगे। अगर आर्टिकल पसंद आए तो दोस्तों के साथ शेयर करें।

भोरमदेव मंदिर | Bhoramdev Mandir Chhattisgarh Hindi

पूर्व की ओर मुख वाला यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जिसमे आपको तीन तरफ से प्रवेश द्वार देखने को मिलते है। मंदिर अंदर से मंडप के जैसे दिखाई पड़ता है, जिससे मंदिर की ऊंचाई 60 फीट तथा चौड़ाई 40 फीट दिखाई पड़ती है, यह मंदिर 5 फिट ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है। मंडप के बीच में 4 स्तम्भ और किनारों में 12 स्तम्भ बना है। जिसमे बहुत सी कलाकृतियाँ और मुर्तियों के अतभुत चित्र दिखाई पड़ते है। मंदिर के गर्भगृह में महादेव का एक छोटा और अतभुत शिवलिंग देखने को मिलता है।

यह भोरमदेव मंदिर एक हज़ार पुराना होने के कारण अपने अंदर कई रहस्यमय कहानियों को छुपाएँ हुए है, जिसके कारण यह मंदिर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बन जाता है। यहाँ प्रतिदिन हजारो श्रद्धालु भक्त भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आते है। लेकिन सावन माह में यहाँ भक्तो की भारी भीड़ देखी जाती है। 

साथ ही यहाँ महाशिवरात्रि और अन्य त्योहारों पर विशेष आयोजन भी देखने को मिल जाता है, प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ यह मंदिर छत्तीसगढ़ ही नही बल्कि देश विदेश में विख्यात है, हर साल यहाँ आपको कई विदेशी पर्यटक देखने को मिल जायेंगे, जो इस मंदिर की शिल्प कला और सुंदर नक्काशी को देखने के लिए आते है।

Bhoramdev Mandir History in Hindi

भोरमदेव मंदिर, जो अपनी शिल्प कला और भव्य वास्तुकला के लिए जानी जाती है  जिसका निर्माण 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच कलचुरी राजवंश, राजा गोपाल देव द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर नागर शैली में निर्मित कराई गई है, जो खुजराहो मंदिर से प्रेरित दिखाई पड़ता है। जिसके कारण इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खुजराहो भी कहाँ जाता है।

मंदिर परिसर के पास आपको एक बड़ा तालाब देखने को मिलता है, जिसमे आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ नौका विहार का आनंद उठा सकते है। यह स्थल वाकई पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय आकर्षण है। मुख्य मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दुरी पर  मडवा महल नामक एक अन्य प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिसके दर्शन करने के लिए आप जा सकते है।

Image from tripadviser

इसके अलावा भी आपको यहाँ प्रकृति के बहुत से सुंदर नज़ारे देखने को मिल जाते है, जिसे आप यहाँ आने के बाद आराम से घूम सकते है। तो यह रही, भोरम देव मंदिर के ऊपर एक छोटा सा आर्टिकल, जिसे आपने एन्जॉय किया होगा। छत्तीसगढ़ की ऐसी ही आर्टिकल देखने के लिए, हमारे फैमिली के साथ जुड़िये और अपना खयाल रखिए, जय जोहार जय छत्तीसगढ़।

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भोरमदेव कैसे पहुचे?

भोरमदेव मंदिर एक मानव निर्मित झील के तट पर स्थित है, जो मैकल पर्वतमाला की तलहटी में है। यह छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के तहसील शहर कवर्धा से लगभग 18 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में है।

भोरमदेव मंदिर तक पहुंचने के तीन तरीके हैं:

  • हवाई मार्ग द्वारा: भोरमदेव मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर (रायपुर हवाई अड्डा) (MAA) है जो लगभग 130 किमी दूर है। आप रायपुर हवाई अड्डे से कवर्धा के लिए आसानी से कैब या टैक्सी बुक कर सकते हैं और फिर कवर्धा से भोरमदेव मंदिर पहुंच सकते हैं।
  • रेल मार्ग द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन (आर) है जो 134 किमी दूर है। हवाई मार्ग से पहुंचने के समान, आप रायपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से कवर्धा के लिए कैब या टैक्सी बुक कर सकते हैं और फिर कवर्धा से भोरमदेव मंदिर पहुंच सकते हैं।
  • सड़क मार्ग द्वारा: भोरमदेव मंदिर पहुंचने के लिए यह परिवहन का सबसे पसंदीदा साधन है।
  • रायपुर (116 किमी), जबलपुर (220 किमी) और रंजनाग (133 किमी) जैसे प्रमुख शहरों से कवर्धा के लिए नियमित बसें चलती हैं।
  • कवर्धा से भोरमदेव मंदिर तक जाने के लिए आपको आसानी से टैक्सी और ऑटो मिल जाते हैं, जो 18 किमी दूर है।

कार द्वारा भोरमदेव मंदिर पहुंचने के लिए आप विभिन्न मार्ग ले सकते हैं:

कुछ प्रश्नों के उत्तर

1. भोरमदेव मंदिर कहाँ स्थित है?

उत्तर: भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित है, जो कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर है।

2. यह मंदिर किस देवता को समर्पित है?

उत्तर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

3. भोरमदेव मंदिर का निर्माण कब हुआ था?

उत्तर: भोरमदेव मंदिर का निर्माण 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच माना जाता है।

4. इस मंदिर की वास्तुकला की विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर:

  • नागर शैली में निर्मित
  • पूर्व की ओर मुख वाला
  • तीन तरफ से प्रवेश द्वार
  • ऊंचे चबूतरे पर बना
  • विशाल मंडप (60 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा)
  • जटिल नक्काशी और मूर्तियों से सुसज्जित स्तंभ
  • गर्भगृह में भगवान शिव का शिवलिंग

5. भोरमदेव मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर:

  • हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल
  • भगवान शिव का प्रमुख मंदिर
  • सावन माह और महाशिवरात्रि में विशेष आयोजन
  • हिंदू त्योहारों (होली, दीवाली) का उत्सव

6. भोरमदेव मंदिर पर्यटकों के लिए क्यों आकर्षक है?

उत्तर:

  • शानदार वास्तुकला और उत्तम शिल्पकला
  • प्राचीन इतिहास और धार्मिक महत्व
  • प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ
  • मंदिर परिसर में तालाब (नौका विहार)
  • आसपास के पर्यटन स्थल (मडवा महल)

7. भोरमदेव मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

उत्तर:

  • अक्टूबर से मार्च (सुखद मौसम)
  • सावन माह (विशेष धार्मिक आयोजन)
  • महाशिवरात्रि (त्योहार)

8. भोरमदेव मंदिर में दर्शन के लिए क्या शुल्क लगता है?

उत्तर:

  • प्रवेश शुल्क: कोई नहीं
  • दान स्वीकार किए जाते हैं

10. भोरमदेव मंदिर की यात्रा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • उचित कपड़े पहनें
  • मंदिर परिसर में शांति बनाए रखें
  • फोटोग्राफी के लिए नियमों का पालन करें
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखें
  • स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करें

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